पुट्टक्काना मक्कलू: ‘पुत्तक्का के बच्चों’ मेले में कुट्टई, नागा, नेवले ठिठके



वो भी एक समय था। सीरियल और सिनेमा के कलाकारों को पर्दे पर अकेले ही देखना पड़ता था। उनकी खूबसूरती, उनके अभिनय, उनके रहन-सहन को देखकर और उनके साथ ऐसा व्यवहार करना जैसे वे स्वर्ग में हों। हम उन्हें केवल दूर से ही देख सकते हैं। मुझे लगा कि करीब से देखना असंभव है। लेकिन समय बदल गया है। स्क्रीन

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